नई दिल्ली: फीडबैक यूनिट स्कैम के विरोध में दिल्ली भाजपा ने केजरीवाल सरकार के खिलाफ विरोध मार्च निकाला है। प्रदर्शनकारी दोपहर 12 बजे आईटीओ के पास शहीदी पार्क में इक्ट्ठा हुए और वहां से दिल्ली सचिवालय आईटीओ के लिए आगे निकले। शहीदी पार्क से सचिवालय की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को आई.टी.ओ. चौक पर पुलिस ने बलपूर्वक रोका तो वह वहीं बैठ गये और चक्का जाम कर मुख्य मंत्री एवं उप मुख्य मंत्री की गिरफ्तारी की मांग को लेकर नारेबाजी की। बाद में दिल्ली प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा आदि को डिटेन कर आई.पी.एस्टेट थाने ले गई जहाँ से उन्हें कुछ देर बाद छोड़ दिया।
इस विरोध मार्च में भाजपा कार्यकर्ता अपने साथ पोस्टर लिए हुए थे, जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दो जासूस के तौर पर प्रदर्शित किया गया था। विरोध मार्च में दिल्ली बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और विपक्ष के नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी, वरिष्ठ नेता विजय गोयल आदि शामिल हुए हैं।
सचदेवा ने कहा जब केजरीवाल 2015 में सत्ता में आये तो उन्होने पहला काम मीडिया के सचिवालय प्रवेश रोकने का किया, फिर अधिकारियों के बोलने पर प्रतिबंध लगाया, भाजपा से जुड़े राजनीतिक विरोधियों को दबाने की चेष्टा की पर पुलिस उनकी सरकार के आधीन ना होने से उसमे सफलता नही मिली। तब बौखलाये केजरीवाल ने राजनीतिक विरोधियों, मीडिया हाउसों, केन्द्रीय मंत्रियों, बड़े व्यपारिक प्रतिष्ठानों आदि पर निगाह रखने के लिये अन्य राज्यों से पुलिसकर्मी लाकर अपनी निजी संस्था एफ.बी.यू. बना डाली। जहाँ एफ.बी.यू. जासूसी अरविंद केजरीवाल की हर तरह के विरोधियों पर जांच का माध्यम थी तो वहीं यह केजरीवाल के द्वारा 2015 में मिले पूर्ण बहुमत के तानाशाही दुरुपयोग का सबसे बड़ा प्रमाण। एफ.बी.यू. जासूसी कांड पर सी.बी.आई. की प्रारम्भिक जांच रिपोर्ट सामने है और मनीष सिसोदिया आदि पर एफ.आई.आर. दर्ज होने जा रही है तब केजरीवाल को इस जासूसी कांड की जिम्मेदारी स्वीकार कर इस्तीफा देना चाहिए।
भाजपा नेता विजय गोयल ने कहा कि आखिर किस कारण अरविंद केजरीवाल जासूसी करा रहे थे और फीडबैक यूनिट किस के आदेश पर शुरू किया है। उन्होंने कहा कि यह सब तो जनता को बताना ही होगा। उन्होंने कहा शिकायत व पुख्ता साक्ष्य होने के बाद अब उपराज्यपाल ने सीबीआई को केस दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
उल्लेखनीय है कि भाजपा नेताओं ने कहा कि फीडबैक यूनिट को लेकर बुधवार को आम आदमी पार्टी से सवाल पूछे थे, कि वे बताएं एसीबी व सतर्कता विभाग के होते हुए भी आखिर केजरीवाल सरकार ने सेवानिवृत्त लोगों को लेकर एफबीयू की स्थापना क्यों की थी। यूनिट स्थापना के पीछे केजरीवाल सरकार का क्या मकसद था, यदि मकसद साफ होता तो सरकार स्थापना के समय उद्देश्य भी बताती। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच में सामने आया की एफबीयू ने केजरीवाल सरकार को लगभग 700 रिपोर्ट दी हैं।
दिल्ली सरकार ने फरवरी 2016 में फीडबैक यूनिट का गठन किया था। यूनिट ने 20 अधिकारियों के साथ काम करना शुरू किया था। आरोप है कि फीडबैक यूनिट में फरवरी से सितंबर 2016 तक राजनीतिक विरोधियों की जासूसी की। फीडबैक यूनिट में सिर्फ भाजपा नेताओं की ही नहीं बल्कि आप से जुड़े नेताओं पर भी नजर रखी।
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