देवरिया: हमारी आंखों के सामने वंचित वर्ग के बच्चों की कई तस्वीरें हैं, जिनमें बच्चे को बाल मजदूरी करते हुए दिखते है. आर्थिक समस्याओं से जूझते बच्चे अपनी पारिवारिक स्थिति से जीत नहीं पाते और पढ़ाई छोड़कर काम करने में जुट जाते हैं.ऐसे दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों के गरीब, वंचित वर्ग के बच्चों के लिए सदासिवन प.पुलिक्कल शिक्षक मसीहा साबित हो रहे है, शिक्षकों के लिए कहा जाता है कि ‘शिक्षक स्वयं जलकर बच्चों का जीवन शिक्षा से रौशन करता है.’ सदासिवन प.पुलिक्कल ने इस बात को सही साबित कर दिखाया है.
उन्होंने शुरुआत में 50 बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने की पहल की और आज ये कारवां बढ़ता जा रहा है देवरिया के रामगुलाम टोला स्थिति नव ज्योति पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल सालों से गरीब बच्चों को पढ़ाने में जुटे हुए हैं। इन बच्चों को शिक्षित कर उनका भविष्य संवार कर वह इन्हें एक बेहतर जिंदगी देना चाहते हैं. खुद पेशे से एक प्राइवेट शिक्षक हैं और शिक्षा देने के अपने उद्देश्य को उन्होंने पूरा करने के लिए ऐसा सराहनीय कदम उठाया है उनकी इस पहल की शुरुआत से लेकर अब तक के सफर के बारे में जानते है। सदासिवन प.पुलिक्कल और बताते है की कुछ बच्चे आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते स्कूल छोड़ देते हैं. ऐसे में उन गरीब बच्चों की मदद करने के लिए फ्री में उन्हें पढ़ाने का विचार आया.
लेकिन मैं आर्थिक रूप से इतना मजबूत नहीं था की एकदम से 40 से 50 बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा पाऊं. इसलिए सदासिवन प.पुलिक्कल ने खुद अपना एक छोटा सा स्कूल खोल बच्चो को शिक्षा देना शुरू किया और आज उनकी मेहनत रंग लाई है और गरीब बच्चो का जीवन सुधर रहा है। सदासिवन प.पुलिक्कल का मानना है की देश और दुनिया का हर बच्चा जो भले किसी भी वर्ग का हो उसे शिक्षा जरूर मिलनी चाहिए. समाज में व्याप्त कई सारी बुराइयों का कारण अशिक्षा है, जिसकी वजह से कई सारी बुराइयां हमारे बीच में फैली हुई हैं.
गरीब या वंचित वर्ग के बच्चे आर्थिक कमजोरी के कारण पढ़ नहीं पाते और पैसे कमाने के लालच में कई गलत काम करते हैं. कोई नशाखोरी में फंसकर रह जाता हैं, तो कोई पन्नी बीनकर अपना पेट पालता है. इन बच्चों को भी अच्छा जीवन जीने का अधिकार है. ऐसे में उन बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए सबको मिलकर पहल करनी चाहिए जितना हो सके ऐसे गरीब वर्ग के बच्चों को सपोर्ट करना चाहिए. जिससे की पढ़कर खुद को और परिवार को एक बेहतर जीवन दे सकें ।
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