नीरजपाराशर आचारय:










* जय श्री राधे *

महर्षि पाराशर पंचांग 



अथ पंचांगम् 


**ll जय श्री राधे ll**










दिनाँक:-19/12/2023, मंगलवार
सप्तमी, शुक्ल पक्ष,
मार्गशीर्ष
“”””””””””””””””””””””””””””””””””””””””(समाप्ति काल)
तिथि———- सप्तमी 13:06:20 तक
पक्ष————————- शुक्ल
नक्षत्र—- पूर्वा भाद्रपदा 24:01:18
योग———— सिद्वि 18:36:55
करण———– वणिज 13:06:20
करण——- विष्टि भद्र 24:08:08
वार———————– मंगलवार
माह———————- मार्गशीर्ष
चन्द्र राशि—— कुम्भ 18:19:48
चन्द्र राशि—————— मीन
सूर्य राशि——————— धनु
रितु————————- हेमंत
आयन—————– दक्षिणायण
संवत्सर—————— शोभकृत
संवत्सर (उत्तर)—————– पिंगल
विक्रम संवत—————- 2080
गुजराती संवत————– 2080
शक संवत—————– 1945
कलि संवत—————– 5124
वृन्दावन
सूर्योदय————— 07:05:27
सूर्यास्त—————- 17:26:50
दिन काल————- 10:21:22
रात्री काल————- 13:39:09
चंद्रोदय—————- 12:11:26
चंद्रास्त—————- 24:15:32
लग्न—- धनु 2°41′ , 242°41′
सूर्य नक्षत्र——————– मूल
चन्द्र नक्षत्र———– पूर्वा भाद्रपदा
नक्षत्र पाया——————– ताम्र


पद, चरण 


सो—- पूर्वा भाद्रपदा 12:39:13
दा—- पूर्वा भाद्रपदा 18:19:48
दी—- पूर्वा भाद्रपदा 24:01:18
दू—- उत्तरा भाद्रपदा 29:43:44


ग्रह गोचर 


ग्रह =राशी , अंश ,नक्षत्र, पद
==========================
सूर्य= धनु 02:30, मूल 1 ये
चन्द्र=कुम्भ 23:30 , पू o भा o 1 गो
बुध =धनु 11:53′ मूल 4 भी
शु क्र=तुला 22°05, विशाखा’ 1 ती
मंगल=वृश्चिक 23 °30 ‘ ज्येष्ठा’ 3 यी
गुरु=मेष 11°30 ‘ अश्विनी , 4 ला
शनि=कुम्भ 08°40 ‘ शतभिषा ,1 गो
राहू=(व) मीन 27°25 रेवती , 4 ची
केतु=(व) कन्या 27°25 चित्रा , 2 पो


शुभा$शुभ मुहूर्त 


राहू काल 14:51 – 16:09 अशुभ
यम घंटा 09:41 – 10:58 अशुभ
गुली काल 12:16 – 13: 34अशुभ
अभिजित 11:55 – 12:37 शुभ
दूर मुहूर्त 09:10 – 09:51 अशुभ
दूर मुहूर्त 22:54 – 23:36 अशुभ
वर्ज्यम 07:22 – 08:53 अशुभ
पंचक अहोरात्र अशुभ
चोघडिया, दिन
रोग 07:05 – 08:23 अशुभ
उद्वेग 08:23 – 09:41 अशुभ
चर 09:41 – 10:58 शुभ
लाभ 10:58 – 12:16 शुभ
अमृत 12:16 – 13:34 शुभ
काल 13:34 – 14:51 अशुभ
शुभ 14:51 – 16:09 शुभ
रोग 16:09 – 17:27 अशुभ
चोघडिया, रात
काल 17:27 – 19:09 अशुभ
लाभ 19:09 – 20:52 शुभ
उद्वेग 20:52 – 22:34 अशुभ
शुभ 22:34 – 24:16* शुभ
अमृत 24:16* – 25:59* शुभ
चर 25:59* – 27:41* शुभ
रोग 27:41* – 29:24* अशुभ
काल 29:24* – 31:06* अशुभ
होरा, दिन
मंगल 07:05 – 07:57
सूर्य 07:57 – 08:49
शुक्र 08:49 – 09:41
बुध 09:41 – 10:33
चन्द्र 10:33 – 11:24
शनि 11:24 – 12:16
बृहस्पति 12:16 – 13:08
मंगल 13:08 – 13:59
सूर्य 13:59 – 14:51
शुक्र 14:51 – 15:43
बुध 15:43 – 16:35
चन्द्र 16:35 – 17:27
होरा, रात
शनि 17:27 – 18:35
बृहस्पति 18:35 – 19:43
मंगल 19:43 – 20:52
सूर्य 20:52 – 21:59
शुक्र 21:59 – 23:08
बुध 23:08 – 24:16
चन्द्र 24:16* – 25:25
शनि 25:25* – 26:33
बृहस्पति 26:33* – 27:41
मंगल 27:41* – 28:49
सूर्य 28:49* – 29:58
शुक्र 29:58* – 31:06
उदयलग्न प्रवेशकाल 
धनु > 05:52 से 07:58 तक
मकर > 07:58 से 09:48 तक
कुम्भ > 09:48 से 11:16 तक
मीन > 11:16 से 12:48 तक
मेष > 12:48 से 14:28 तक
वृषभ > 14:28 से 16:22 तक
मिथुन > 16:22 से 18:38 तक
कर्क > 18:38 से 20:56 तक
सिंह > 20:56 से 23:10 तक
कन्या > 23:10 से 01:20 तक
तुला > 01:20 से 03:26 तक
वृश्चिक > 03:26 से 05:48 तक
विभिन्न शहरों का रेखांतर (समय)संस्कार
(लगभग-वास्तविक समय के समीप)
दिल्ली +10मिनट——— जोधपुर -6 मिनट
जयपुर +5 मिनट—— अहमदाबाद-8 मिनट
कोटा +5 मिनट———— मुंबई-7 मिनट
लखनऊ +25 मिनट——–बीकानेर-5 मिनट
कोलकाता +54—–जैसलमेर -15 मिनट
नोट– दिन और रात्रि के चौघड़िया का आरंभ क्रमशः सूर्योदय और सूर्यास्त से होता है।
प्रत्येक चौघड़िए की अवधि डेढ़ घंटा होती है।
चर में चक्र चलाइये , उद्वेगे थलगार ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार करे,लाभ में करो व्यापार ॥
रोग में रोगी स्नान करे ,काल करो भण्डार ।
अमृत में काम सभी करो , सहाय करो कर्तार ॥
अर्थात- चर में वाहन,मशीन आदि कार्य करें ।
उद्वेग में भूमि सम्बंधित एवं स्थायी कार्य करें ।
शुभ में स्त्री श्रृंगार ,सगाई व चूड़ा पहनना आदि कार्य करें ।
लाभ में व्यापार करें ।
रोग में जब रोगी रोग मुक्त हो जाय तो स्नान करें ।
काल में धन संग्रह करने पर धन वृद्धि होती है ।
अमृत में सभी शुभ कार्य करें ।
दिशा शूल ज्ञान————-उत्तर
परिहार-: आवश्यकतानुसार यदि यात्रा करनी हो तो घी अथवा गुड खाके यात्रा कर सकते है l
इस मंत्र का उच्चारण करें-:
शीघ्र गौतम गच्छत्वं ग्रामेषु नगरेषु च l
भोजनं वसनं यानं मार्गं मे परिकल्पय: ll
अग्नि वास ज्ञान -:
यात्रा विवाह व्रत गोचरेषु,
चोलोपनिताद्यखिलव्रतेषु ।
दुर्गाविधानेषु सुत प्रसूतौ,
नैवाग्नि चक्रं परिचिन्तनियं ।। महारुद्र व्रतेSमायां ग्रसतेन्द्वर्कास्त राहुणाम्
नित्यनैमित्यके कार्ये अग्निचक्रं न दर्शायेत् ।।
7 + 3 + 1 = 11 ÷ 4 = 3 शेष
मृत्यु लोक पर अग्नि वास हवन के लिए शुभ कारक है l

ग्रह मुख आहुति ज्ञान 

सूर्य नक्षत्र से अगले 3 नक्षत्र गणना के आधार पर क्रमानुसार सूर्य , बुध , शुक्र , शनि , चन्द्र , मंगल , गुरु , राहु केतु आहुति जानें । शुभ ग्रह की आहुति हवनादि कृत्य शुभपद होता है
शुक्र ग्रह मुखहुति
शिव वास एवं फल -:
7 + 7 + 5 = 19 ÷ 7 = 5 शेष
ज्ञानवेलायां = कष्ट कारक
भद्रा वास एवं फल -:
स्वर्गे भद्रा धनं धान्यं ,पाताले च धनागम:।
मृत्युलोके यदा भद्रा सर्वकार्य विनाशिनी।।
दोपहर 13:00 से रात्रि 24:10
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