जिंदगी के 75वें बसंत में पहुंचे पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, राजनीति में तय किया शानदार सफर

राष्ट्रीय जजमेंट न्यूज

आज यानी की 01 जुलाई को भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति और राष्ट्रीय राजनीति में शुचिता के प्रतीक वेंकैया नायडू अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। वेंकैया नायडू ने उपराष्ट्रपति बनने से पहले एक राजनेता के रूप में एक शानदार सफर तय किया। साल 2017 में वह देश के 13वें उपराष्ट्रपति बने थे। वेंकैया नायडू को अत्यधिक सम्मानित सार्वजनिक हस्तियों में से एक माना जाता है। आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…जन्म और शिक्षाआंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले के चावतापलेम गांव में 01 जुलाई 1949 को वेंकैया नायडू का जन्म हुआ था। शुरूआती शिक्षा पूरी होने के बाद उन्होंने आंध्र यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लॉ, विशाखापत्तनम से कानून में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। फिर वह आरएसएस से जुड़ गए। इसके साथ ही साल 1977 से 1980 तक वह प्रदेश में जनता पार्टी यूथ विंग के अध्यक्ष रहे। जब देश में आपातकाल लगाया गया था, उस दौरान तत्कालीन कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ नायडू अपनी राजनीतिक सक्रियता के चलते सुर्खियों में आए थे। आपातकाल के दौरान सरकार द्वारा उनको भी गिरफ्तार किया गया। वहीं आपातकाल खत्म होने के बाद साल 1978 में नायडू को राज्य विधानसभा के लिए चुना गया। वह साल 1985 तक इस पद पर बने रहे।राजनीतिक सफरवहीं साल 1980 में भाजपा पार्टी के गठन के बाद नायडू को यूथ विंग का उपाध्यक्ष बना दिया गया। फिर जल्द ही वह राज्य महासचिव के पद पर पदोन्नत हुए और राज्य इकाई प्रमुख और भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में उनको पार्टी की तरफ से चुना गया। साल 1993 से लेकर साल 2000 तक वह भारतीय जनता पार्टी के महासचिव रहे, इस दौरान नायडू ने पार्टी प्रवक्ता के तौर पर भी काम किया।साल 1999 में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की जीत के बाद वह वाजपेयी सरकार में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री के रूप में काम किया। साल 2003 में नायडू ने भाजपा अध्यक्ष के तौर पर जन कृष्णमूर्ति की जगह ली। इस पद पर तीन साल के कार्यकाल के बाद उनको निर्विरोध चुना गया। इसके बाद आम चुनाव में एनडीए को मिली हार के बाद साल 2004 में उन्होंने इस्तीफा दे दिया। लेकिन वह उपाध्यक्षों में से एक के रूप में अपने पद पर बने रहे। साल 1998 से लेकर 2016 तक उन्होंने कर्नाटक से राज्यसभा में लगातार तीन कार्यकाल दिए।फिर साल 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद नायडू को शहरी विकास और संसदीय मामलों का विभाग सौंपा गया। फिर साल 2016 में उन्होंने सूचना और प्रसारण मंत्री का पदभार संभाला। वहीं साल 2017 में उन्होंने उपराष्ट्रपति के रूप में सेवा की और फिर दोनों पदों से इस्तीफा दे दिया।

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