विश्व हिंदू परिषद ने हुमायूं के मकबरे का किया निरीक्षण, ऐतिहासिक संदर्भों पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: विश्व हिंदू परिषद के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को दिल्ली स्थित हुमायूं के मकबरे का निरीक्षण किया। यह दौरा दिल्ली प्रांत के ऐतिहासिक संदर्भों का अध्ययन करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। निरीक्षण का नेतृत्व विहिप के प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने किया, जिन्होंने इस अवसर पर कई महत्त्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया। इस प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यह कदम ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाने और उनके विश्लेषण के लिए उठाया गया है, न कि किसी विवाद को जन्म देने के लिए।

निरीक्षण के बाद प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता ने कहा, “हम दिल्ली प्रांत के ऐतिहासिक संदर्भों का अध्ययन कर रहे हैं। विभिन्न कालखंडों के शासकों को आवंटित भूमि और उनके योगदान का विश्लेषण करना हमारा उद्देश्य है।” उन्होंने इस दौरान दिल्ली के इतिहास से जुड़े कुछ अनुत्तरित सवाल भी उठाए। गुप्ता ने पूछा, “क्या केवल यही नायक-नायिकाएं दिल्ली के इतिहास से जुड़े हुए हैं? आनंदपाल तोमर, जिनका शासन 300 वर्षों तक रहा, उनके लिए कोई स्मारक क्यों संरक्षित नहीं किया गया?” उन्होंने जोर देकर कहा कि दिल्ली के इतिहास को केवल कुछ खास शासकों तक सीमित नहीं किया जा सकता।

हाल के दिनों में मकबरों और ऐतिहासिक स्थलों के नाम बदलने की अटकलों पर भी सुरेंद्र गुप्ता ने अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “मकबरों के नाम बदले नहीं जा सकते, लेकिन मार्गों के नाम हिंदू नायकों के नाम पर रखे जाने चाहिए।” इससे न केवल ऐतिहासिक नायकों को सम्मान मिलेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उनके योगदान की जानकारी भी होगी।

प्रांत मंत्री ने इस निरीक्षण को लेकर किसी भी विवादित अर्थ निकालने की आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “यह एक ऐतिहासिक अध्ययन है, जिसका उद्देश्य तथ्यों को सामने लाना है। इसकी पूरी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी।” गुप्ता ने विपक्ष पर भी निशाना साधा और उनके द्वारा इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने के प्रयासों को नकारते हुए कहा कि यह अध्ययन विशुद्ध रूप से शैक्षिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से किया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी घोषणा की कि उनका अगला पड़ाव सफदरजंग मकबरा होगा, जिसका निरीक्षण जल्द ही किया जाएगा।

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