हैदराबाद विश्वविद्यालय की 400 एकड़ भूमि पर नीलामी का विरोध: एबीवीपी ने शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

नई दिल्ली: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने हैदराबाद विश्वविद्यालय की 400 एकड़ भूमि की नीलामी के खिलाफ तीव्र विरोध जताते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एक ज्ञापन सौंपा। एबीवीपी ने तेलंगाना सरकार को चेतावनी दी है कि विश्वविद्यालय की जमीन पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संगठन ने इस मुद्दे पर प्रेस वार्ता कर अपनी मांग को मजबूती से रखा और कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक विश्वविद्यालय को उसका हक वापस नहीं मिल जाता।

एबीवीपी के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर मांग की कि केंद्र सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर इस भूमि को बचाए। संगठन का कहना है कि यह भूमि शैक्षिक और पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यह न केवल शिक्षा और अनुसंधान के लिए समर्पित है, बल्कि अपनी समृद्ध जैवविविधता के कारण एक पारिस्थितिक धरोहर भी है। इस क्षेत्र में दुर्लभ प्रजातियों का प्राकृतिक आवास है, और इसका निजी हाथों में जाना पर्यावरणीय संतुलन को गंभीर नुकसान पहुंचाएगा।

एबीवीपी ने तेलंगाना सरकार पर छात्रों की आवाज को दबाने का आरोप लगाया। संगठन के अनुसार, जब छात्रों और अभाविप कार्यकर्ताओं ने इस नीलामी के खिलाफ प्रदर्शन किया, तो तेलंगाना पुलिस ने बिना अनुमति विश्वविद्यालय परिसर में घुसकर छात्रों को गिरफ्तार किया। इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला करार देते हुए एबीवीपी ने केंद्र सरकार से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। संगठन चाहता है कि 400 एकड़ भूमि विश्वविद्यालय को लौटाई जाए और कुल 2320 एकड़ जमीन का आधिकारिक हस्तांतरण सुनिश्चित हो।

एबीवीपी की राष्ट्रीय मंत्री शिवांगी खारवाल ने कहा, “यह भूमि हमारी शैक्षिक और पर्यावरणीय धरोहर है। इसे निजी कंपनियों को देना छात्रों के अधिकारों पर हमला है। हम इसके खिलाफ जरूरत पड़ने पर देशव्यापी आंदोलन छेड़ेंगे।” वहीं, राष्ट्रीय मंत्री श्रवण बी. राज ने जोड़ा, “विश्वविद्यालय की जमीन का इस्तेमाल सिर्फ शिक्षा और शोध के लिए होना चाहिए, न कि व्यावसायिक मुनाफे के लिए। हम छात्रों को संगठित कर इस लड़ाई को तेज करेंगे। शिक्षा मंत्री ने आश्वासन दिया है कि केंद्र सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है और तेलंगाना सरकार से बातचीत शुरू हो चुकी है।”

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