PFI पर गृह मंत्रालय ने कड़ी कार्रवाई की है. एजेंसियों के इनपुट के बाद पांच साल का बैन लगा दिया है. इसके अलावा पीएफआई के सहयोगी संगठनों पर भी बैन लगाया गया है. गृह मंत्रालय की ओर से जारी लेटर में साफ लिखा है कि ये संगठन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर पीएफआई की मदद करते थे. इसमें से कई संगठन ऐसे हैं जोकि फंडिंग किया करते हैं. पीएफआई के सहयोगी संगठन जैसे रिहैब इंडिया फाउंडेशन , कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया, ऑल इंडिया इमाम काउंसिल, नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन नेशनल विमेन फ्रंट, जूनियर फ्रंट को भी बैन करने का बड़ा फैसला लिया गया है.
केंद्र सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि अगर पीएफआई और इसके सहयोगी संगठन या संबंध संस्थाओं या अग्रणी संगठनों के गैर-कानूनी क्रियाकलापों पर तत्काल रोक या नियंत्रण न लगाया गया तो पीएफआई और इसके सहयोगी संगठन या संबंध संस्थाएं या अग्रणी संगठन विध्वंसात्मक गतिविधियों को जारी रखेंगे, आतंक आधारित रिग्रेसिव रिजीम को प्रोत्साहित करेंगे, एक वर्ग विशेष के लोगों में देश के प्रति असंतोष पैदा करेंगे और देश की अखंडता, सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों को और तेज करेंगे।
हाल ही में पड़े छापों के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने PFI के खिलाफ ताबड़तोड़ छापेमारी कर उसके कई पदाधिकारियों की गिरफ्तारी की है. 22 और 27 सितंबर को NIA, ED और राज्यों की पुलिस ने PFI के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी. पहले राउंड की छापेमारी में PFI से जुड़े 106 लोग गिरफ्तार हुए थे. वहीं दूसरे राउंड की छापेमारी में 247 लोग गिरफ्तार हुए या हिरासत में लिए गए. जांच एजेंसियों का दावा है कि उन्हें PFI के खिलाफ पर्याप्त सबूत मिले हैं. इसके बाद गृह मंत्रालय ने PFI को UAPA के तहत ‘गैरकानूनी’ संगठन घोषित किया है.
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