21 विपक्षी दलों की 50% वीवीपैट पर्चियों के मिलान की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को जारी किया नोटिस, 25 को होगी सुनवाई

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 21 विपक्षी दलों की वीवीपैट पर्चियों के मिलान की मांग को लेकर दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया। साथ ही कोर्ट ने आयोग से अपनी मदद के लिए एक सीनियर अफसर को अपॉइंट करने को भी कहा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।
विपक्षी दलों की मांग है कि आम चुनावों के नतीजे से पहले कम से कम 50% वोटों का मिलान वीवीपैट की पर्चियों से किया जाए। इस बार आम चुनाव पिछले कई चुनावों से अलग होगा।
इस बार के लोकसभा चुनाव में ईवीएम के साथ हर मतदान केंद्र वीवीपीएटी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इतना ही नहीं इस बार ईवीएम मशीन में चुनाव चिन्ह्र के साथ-साथ उम्मीदवार की तस्वीर भी होगी।
ईवीएम की विश्वसनीयता पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
कोर्ट जाने वाली पार्टियों में कांग्रेस, चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी, शरद पवार की एनसीपी, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी, वामपंथी पार्टियां, समाजवादी पार्टी और मायावती शामिल हैं. गौरतलब है कि पिछले कई विधानसभा चुनावों में विपक्षी दलों ने ईवीएम पर सवाल उठाए थे।
हालांकि चुनाव आयोग लगातार इस बात से इंकार करता रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ अखिलेश यादव भी ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल चुके हैं। जहां राहुल गांधी गुजरात विधानसभा चुनाव में हार के बाद तो अखिलेश यादव ने यूपी चुनाव में हार के बाद ईवीएम पर सवाल खड़ा किया था।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। इस बार आम चुनाव 7 चरणों में होना है। इसी आम चुनाव में नतीजों से पहले विपक्ष ईवीएम को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है।

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